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mahabharat 5.185.36: भीष्म! इस संसार में तुम्हारे समान कोई क्षत्रिय नहीं है जो पृथ्वी पर विचरण करता हो। जाओ, तुमने इस युद्ध में मुझे बहुत संतुष्ट किया है।॥36॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.185.36 
त्वत्समो नास्ति लोकेऽस्मिन् क्षत्रिय: पृथिवीचर:।
गम्यतां भीष्म युद्धेऽस्मिंस्तोषितोऽहं भृशं त्वया॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! इस संसार में तुम्हारे समान कोई क्षत्रिय नहीं है जो पृथ्वी पर विचरण करता हो। जाओ, तुमने इस युद्ध में मुझे बहुत संतुष्ट किया है।॥36॥
 
Bhishma! There is no Kshatriya like you in this world who walks on the earth. Go, you have satisfied me a lot in this war.'॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)