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mahabharat 5.185.33: युद्धभूमि में दृढ़ खड़े होकर उन्होंने प्रेमपूर्वक मुझसे कहा - 'महाबाहो! अपने गुरु परशुराम के पास जाओ और जगत् का कल्याण करो।'॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.185.33 
ते मां सप्रणयं वाक्यमब्रुवन् समरे स्थितम्।
प्रैहि रामं महाबाहो गुरुं लोकहितं कुरु॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में दृढ़ खड़े होकर उन्होंने प्रेमपूर्वक मुझसे कहा - 'महाबाहो! अपने गुरु परशुराम के पास जाओ और जगत् का कल्याण करो।'॥ 33॥
 
Standing firm on the battlefield, he lovingly told me - 'Mahabaho! Go to your guru Parashurama and do good to the world.'॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)