vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति
»
श्लोक 33
श्लोक
5.185.33
ते मां सप्रणयं वाक्यमब्रुवन् समरे स्थितम्।
प्रैहि रामं महाबाहो गुरुं लोकहितं कुरु॥ ३३॥
अनुवाद
युद्धभूमि में दृढ़ खड़े होकर उन्होंने प्रेमपूर्वक मुझसे कहा - 'महाबाहो! अपने गुरु परशुराम के पास जाओ और जगत् का कल्याण करो।'॥ 33॥
Standing firm on the battlefield, he lovingly told me - 'Mahabaho! Go to your guru Parashurama and do good to the world.'॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×