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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति
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श्लोक 32
श्लोक
5.185.32
ततोऽहं पुनरेवाथ तानष्टौ ब्रह्मवादिन:।
अद्राक्षं दीप्यमानान् वै ग्रहानष्टाविवोदितान्॥ ३२॥
अनुवाद
इसी समय मैंने पुनः आठ ब्रह्मवादी वसुओं को आकाश में उदय होते हुए आठ ग्रहों के समान चमकते हुए देखा।
At this very time I once again saw the eight Brahmavadi Vasus shining like the eight planets rising in the sky.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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