श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.185.31 
एवं ब्रुवन्तस्ते सर्वे प्रतिरुध्य रणाजिरम्।
न्यासयांचक्रिरे शस्त्रं पितरो भृगुनन्दनम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर उन सबने युद्धभूमि को घेर लिया और पितरों ने परशुराम के पुत्र भृगु से अपने हथियार रखवा दिए।
 
Saying this, all of them surrounded the battlefield and the ancestors made Bhrigu son of Parashurama put down his weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)