श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  5.185.29-30 
नावनीतं हि हृदयं विप्राणां शाम्य भार्गव॥ २९॥
राम राम निवर्तस्व युद्धादस्माद् द्विजोत्तम।
अवध्यो वै त्वया भीष्मस्त्वं च भीष्मस्य भार्गव॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भृगुनन्दन! ब्राह्मणों का हृदय नवनीत के समान कोमल है; अतः शान्त हो जाओ। विप्रवर परशुराम! इस युद्ध से निवृत्त हो जाओ। भार्गव! तुम्हारे लिए भीष्म और भीष्म के लिए तुम व्यर्थ हो। 29-30॥
 
Bhrigunandan! The heart of Brahmins is as soft as Navneet; So calm down. Vipravar Parshuram! Retire from this war. Bhargava! For you Bhishma and for Bhishma you are useless. 29-30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)