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mahabharat 5.185.22-23h: आज से पहले भी मैं कभी किसी युद्ध से पीछे नहीं हटा हूँ। अतः हे पितामह! आप लोग अपनी इच्छानुसार पहले गंगानन्दन भीष्म को युद्ध से विदा कर दें। मैं स्वयं किसी भी प्रकार इस युद्ध से पीछे नहीं हटूँगा।॥22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  5.185.22-23h 
न निवर्तितपूर्वश्च कदाचिद् रणमूर्धनि।
निवर्त्यतामापगेय: कामं युद्धात् पितामहा:॥ २२॥
न त्वहं विनिवर्तिष्ये युद्धादस्मात् कथंचन।
 
 
अनुवाद
आज से पहले भी मैं कभी किसी युद्ध से पीछे नहीं हटा हूँ। अतः हे पितामह! आप लोग अपनी इच्छानुसार पहले गंगानन्दन भीष्म को युद्ध से विदा कर दें। मैं स्वयं किसी भी प्रकार इस युद्ध से पीछे नहीं हटूँगा।॥22 1/2॥
 
‘Even before today I have never backed out from any battle. Therefore, O Grandfather! You all should first retire Ganganandan Bhishma from the battle as per your wish. I myself will not back out from this battle in any way.’॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)