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mahabharat 5.185.21: भीष्म कहते हैं - हे राजन! जब पितरों ने ऐसा कहा, तो परशुराम ने उन्हें उत्तर दिया - 'मैं युद्ध में पीठ नहीं दिखाऊँगा। यह मेरी बहुत समय से चली आ रही प्रतिज्ञा है।'   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.185.21 
भीष्म उवाच
एवमुक्त: स पितृभि: पितॄन् रामोऽब्रवीदिदम्।
नाहं युधि निवर्तेयमिति मे व्रतमाहितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! जब पितरों ने ऐसा कहा, तो परशुराम ने उन्हें उत्तर दिया - 'मैं युद्ध में पीठ नहीं दिखाऊँगा। यह मेरी बहुत समय से चली आ रही प्रतिज्ञा है।'
 
Bhishma says - O King! When the ancestors said this, Parshuram replied to them - 'I will not turn my back in the war. This is a vow I have been observing since a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)