vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति
»
श्लोक 2
श्लोक
5.185.2
अयुञ्जमेव चैवाहं तदस्त्रं भृगुनन्दने।
प्रस्वापं मां प्रयुञ्जानं नारदो वाक्यमब्रवीत्॥ २॥
अनुवाद
फिर भी मैंने भृगुनंदन परशुरामजी को लक्ष्य करके उस अस्त्र को अपने धनुष पर चढ़ा लिया। मुझे प्रस्वपनास्त्र चलाते देख नारदजी ने इस प्रकार कहा -॥2॥
However, I aimed at Bhrigunandan Parshuramji and mounted that weapon on my bow. Seeing me using Prasvapanastra, Naradji said thus -॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×