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mahabharat 5.185.18-19h: भृगुनन्दन! ये गंगा और शान्तनु के पुत्र भीष्म वास्तव में वसु हैं। इन्हें आप कैसे जीत सकते हैं? अतः आप यहीं युद्ध से निवृत्त हो जाइए। 18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  5.185.18-19h 
गाङ्गेय: शान्तनो: पुत्रो वसुरेष महायशा:॥ १८॥
कथं शक्यस्त्वया जेतुं निवर्तस्वेह भार्गव।
 
 
अनुवाद
भृगुनन्दन! ये गंगा और शान्तनु के पुत्र भीष्म वास्तव में वसु हैं। इन्हें आप कैसे जीत सकते हैं? अतः आप यहीं युद्ध से निवृत्त हो जाइए। 18 1/2॥
 
Bhrigunandan! This great son of Ganga and Shantanu, Bhishma is actually Vasu. How can you win these? Therefore, retire from the war here. 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)