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mahabharat 5.185.14-17h: भृगु नन्दन! तुम्हारा कल्याण हो। हे प्रचण्ड योद्धा! तुमने जो धनुष उठाया है, वह पर्याप्त है। अब इसे त्याग दो और तप करो। देखो, इन समस्त देवताओं ने शान्तनु नन्दन भीष्म को भी रोक दिया है। वे उन्हें प्रसन्न करके कह रहे हैं, 'तुम्हें युद्ध से निवृत्त हो जाना चाहिए। परशुराम तुम्हारे गुरु हैं। तुम्हें उनसे बार-बार युद्ध नहीं करना चाहिए। कौरवश्रेष्ठ! युद्ध में परशुराम को परास्त करना तुम्हारे लिए कदापि उचित नहीं है। गंगा नन्दन! तुम्हें इस युद्धभूमि में अपने ब्राह्मण गुरु का आदर करना चाहिए।'॥14–16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 14-17h
 
 
श्लोक  5.185.14-17h 
पर्याप्तमेतद् भद्रं ते तव कार्मुकधारणम्।
विसर्जयैतद् दुर्धर्ष तपस्तप्यस्व भार्गव॥ १४॥
एष भीष्म: शान्तनवो देवै: सर्वैर्निवारित:।
निवर्तस्व रणादस्मादिति चैव प्रसादित:॥ १५॥
रामेण सह मा योत्सीर्गुरुणेति पुन: पुन:।
न हि रामो रणे जेतुं त्वया न्याय्य: कुरूद्वह॥ १६॥
मानं कुरुष्व गाङ्गेय ब्राह्मणस्य रणाजिरे।
 
 
अनुवाद
भृगु नन्दन! तुम्हारा कल्याण हो। हे प्रचण्ड योद्धा! तुमने जो धनुष उठाया है, वह पर्याप्त है। अब इसे त्याग दो और तप करो। देखो, इन समस्त देवताओं ने शान्तनु नन्दन भीष्म को भी रोक दिया है। वे उन्हें प्रसन्न करके कह रहे हैं, 'तुम्हें युद्ध से निवृत्त हो जाना चाहिए। परशुराम तुम्हारे गुरु हैं। तुम्हें उनसे बार-बार युद्ध नहीं करना चाहिए। कौरवश्रेष्ठ! युद्ध में परशुराम को परास्त करना तुम्हारे लिए कदापि उचित नहीं है। गंगा नन्दन! तुम्हें इस युद्धभूमि में अपने ब्राह्मण गुरु का आदर करना चाहिए।'॥14–16 1/2॥
 
Bhrigu Nandan! May you be blessed. O fierce warrior! The bow that you have picked up is enough. Now give it up and do penance. See, all these gods have stopped even Shantanu Nandan Bhishma. They are pleasing him and saying, 'You should retire from the war. Parashuram is your Guru. You should not fight with him again and again. Best of the Kurus! It is never fair for you to defeat Parashuram in the war. Ganga Nandan! You should respect your Brahmin Guru in this battlefield.'॥ 14–16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)