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mahabharat 5.185.13: महाबाहो! पुत्र! भीष्म के साथ युद्ध करके तुमने जो विनाशकारी कार्य किया है, वह बहुत हो गया। अब तुम्हें यह युद्ध छोड़ देना चाहिए॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.185.13 
वत्स पर्याप्तमेतावद् भीष्मेण सह संयुगे।
विमर्दस्ते महाबाहो व्यपयाहि रणादित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! पुत्र! भीष्म के साथ युद्ध करके तुमने जो विनाशकारी कार्य किया है, वह बहुत हो गया। अब तुम्हें यह युद्ध छोड़ देना चाहिए॥13॥
 
Mahabaho! Son! By fighting with Bhishma, you have done such a destructive act, this is enough. Now you should leave this battle.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)