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mahabharat 5.185.1: भीष्मजी कहते हैं- राजन! कौरवनन्दन! उसके बाद ‘भीष्म! स्वप्नरूपी अस्त्र का प्रयोग मत करो।’ इस प्रकार आकाश में महान कोलाहल मच गया॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.185.1 
भीष्म उवाच
ततो हलहलाशब्दो दिवि राजन् महानभूत्।
प्रस्वापं भीष्म मा स्राक्षीरिति कौरवनन्दन॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- राजन! कौरवनन्दन! उसके बाद ‘भीष्म! स्वप्नरूपी अस्त्र का प्रयोग मत करो।’ इस प्रकार आकाश में महान कोलाहल मच गया॥1॥
 
Bhishmaji says- Rajan! Kauravanandan! After that 'Bhishma! Do not use the weapon of dreams.' Thus there was a great uproar in the sky. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)