श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 184: भीष्म तथा परशुरामजीका एक-दूसरेपर शक्ति और ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.184.6 
ततो भरतशार्दूल धिष्ण्यमाकाशगं यथा।
स मामभ्यवधीत् तूर्णं जत्रुदेशे कुरूद्वह॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! कुरुकुलरत्न! तब वह दिव्य तारा के समान चमकने वाली शक्ति ने तुरंत आकर मेरे कंठ पर आघात किया। 6॥
 
Bharatshrestha! Kurukularatna! Then that power which was shining like a celestial star immediately came and struck the collarbone of my neck. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)