श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 184: भीष्म तथा परशुरामजीका एक-दूसरेपर शक्ति और ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.184.4 
तत: परमसंक्रुद्ध: पुनरेव महातपा:।
ह्यस्तनेन च कोपेन शक्तिं वै प्राहिणोन्मयि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब महातपस्वी परशुरामजी मुझ पर पुनः अत्यन्त क्रोधित हो गए। पहले भी वे क्रोधित हुए थे। उसी से प्रेरित होकर उन्होंने मुझ पर अपनी शक्ति का प्रयोग किया॥4॥
 
Then the great ascetic Parasuram again became very angry with me. Earlier too he was angry. Inspired by that he used his Shakti on me.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)