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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 184: भीष्म तथा परशुरामजीका एक-दूसरेपर शक्ति और ब्रह्मास्त्रका प्रयोग
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श्लोक 21
श्लोक
5.184.21
प्रजज्वाल नभो राजन् धूमायन्ते दिशो दश।
न स्थातुमन्तरिक्षे च शेकुराकाशगास्तदा॥ २१॥
अनुवाद
महाराज! उस समय आकाश जल रहा था। चारों ओर धुआँ फैल रहा था। आकाश में उड़ने वाले प्राणी भी आकाश में नहीं टिक पा रहे थे।
King! At that time the sky was burning. Smoke was spreading in all directions. Even the creatures flying in the sky could not stay in the sky.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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