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mahabharat 5.184.14: तब उसके महान तपस्वी मित्र अकृतव्रण ने उसे गले लगाया और सुन्दर वचनों द्वारा अनेक प्रकार से आश्वासन दिया ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 5.184: भीष्म तथा परशुरामजीका एक-दूसरेपर शक्ति और ब्रह्मास्त्रका प्रयोग   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 184: भीष्म तथा परशुरामजीका एक-दूसरेपर शक्ति और ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.184.14 
तत एनं परिष्वज्य सखा विप्रो महातपा:।
अकृतव्रण: शुभैर्वाक्यैराश्वासयदनेकधा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब उसके महान तपस्वी मित्र अकृतव्रण ने उसे गले लगाया और सुन्दर वचनों द्वारा अनेक प्रकार से आश्वासन दिया ॥14॥
 
Then his great ascetic friend Akritavrana embraced him and assured him in many ways with beautiful words. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)