श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 184: भीष्म तथा परशुरामजीका एक-दूसरेपर शक्ति और ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.184.12 
सम्प्राप्य तु पुन: संज्ञां जामदग्न्याय धीमते।
प्राहिण्वं विमलां शक्तिं ज्वलन्तीमशनीमिव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जब मैं होश में आया, तब मैंने बुद्धिमान परशुरामजी पर प्रज्वलित वज्र के समान एक तेज शक्ति चलाई ॥12॥
 
When I regained consciousness, I fired a bright power like a blazing thunderbolt on the intelligent Parashuramji. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)