श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 184: भीष्म तथा परशुरामजीका एक-दूसरेपर शक्ति और ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.184.10 
स संरब्ध: समावृत्य शरं कालान्तकोपमम्।
संदधे बलवत् कृष्य घोरं शत्रुनिबर्हणम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब वह भी क्रोधित हो गया और उसने मृत्यु और काल के समान भयंकर बाण हाथ में लेकर धनुष को बलपूर्वक खींचकर उसके ऊपर चढ़ा दिया।
 
Then he too became furious and taking in his hand the arrow which was as dreadful as that of death and death, he forcefully pulled the bow and placed it on top of it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)