श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 183: भीष्मको अष्टवसुओंसे प्रस्वापनास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.183.9 
उत्तिष्ठ मा भैर्गाङ्गेय न भयं तेऽस्ति किंचन।
रक्षामहे त्वां कौरव्य स्वशरीरं हि नो भवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
गंगानंदन! उठो! डरो मत। तुम्हें किसी बात का भय नहीं है। कुरुनंदन! हम तुम्हारी रक्षा करते हैं, क्योंकि तुम हमारे ही स्वरूप हो॥9॥
 
Ganganandan! Get up! Do not be afraid. You have nothing to fear. Kuru Nandan! We protect you, because you are our own form.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)