श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 183: भीष्मको अष्टवसुओंसे प्रस्वापनास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.183.4 
न च रामं महावीर्यं शक्नोमि रणमूर्धनि।
विजेतुं समरे विप्रं जामदग्न्यं महाबलम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
परंतु मैं युद्धभूमि के मुहाने पर महाबली और पराक्रमी ब्राह्मण परशुराम को किसी भी प्रकार से पराजित नहीं कर सकता ॥4॥
 
But I cannot defeat the mighty and valiant Brahmin Parashurama at the mouth of the battle field in any manner. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)