vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 183: भीष्मको अष्टवसुओंसे प्रस्वापनास्त्रकी प्राप्ति
»
श्लोक 4
श्लोक
5.183.4
न च रामं महावीर्यं शक्नोमि रणमूर्धनि।
विजेतुं समरे विप्रं जामदग्न्यं महाबलम्॥ ४॥
अनुवाद
परंतु मैं युद्धभूमि के मुहाने पर महाबली और पराक्रमी ब्राह्मण परशुराम को किसी भी प्रकार से पराजित नहीं कर सकता ॥4॥
But I cannot defeat the mighty and valiant Brahmin Parashurama at the mouth of the battle field in any manner. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×