vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 183: भीष्मको अष्टवसुओंसे प्रस्वापनास्त्रकी प्राप्ति
»
श्लोक 18
श्लोक
5.183.18
न च रामेण मर्तव्यं कदाचिदपि पार्थिव।
तत: समुत्पन्नमिदं प्रस्वापं युज्यतामिति॥ १८॥
अनुवाद
हे राजन! परशुराम कभी नहीं मर सकते; इसलिए इस प्रस्वाप नामक अस्त्र का प्रयोग करो, जो तुमने प्राप्त किया है।'
O King! Parasurama can never die; therefore use this weapon called Prasvaap which you have obtained.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×