श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 183: भीष्मको अष्टवसुओंसे प्रस्वापनास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.183.13 
तत् स्मरस्व महाबाहो भृशं संयोजयस्व च।
उपस्थास्यति राजेन्द्र स्वयमेव तवानघ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! इस अस्त्र का स्मरण करो और इसका अनन्य भाव से प्रयोग करो। भोले राजेन्द्र! यह अस्त्र स्वतः ही तुम्हारी सेवा में उपस्थित रहेगा। 13॥
 
Mahabaho! Remember this weapon and use it exclusively. Innocent Rajendra! This weapon will automatically be available at your service. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)