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mahabharat 5.182.27-28: परशुराम ताड़ के वृक्ष के समान विशाल धनुष धारण किए हुए थे। जब वे मेरे लिए बाण उठाने लगे, तो दयालु ऋषियों ने उन्हें रोक दिया। वह बाण काली अग्नि के समान भयंकर था। क्रोधित होते हुए भी, ऋषियों के कहने पर अमर भार्गव ने उस बाण का अंत कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.182: भीष्म और परशुरामका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 182: भीष्म और परशुरामका युद्ध  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  5.182.27-28 
आददानो महाबाहु: कार्मुकं तालसंनिभम्।
ततो मय्याददानं तं राममेव न्यवारयन्॥ २७॥
महर्षय: कृपायुक्ता: क्रोधाविष्टोऽथ भार्गव:।
स मेऽहरदमेयात्मा शरं कालानलोपमम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
परशुराम ताड़ के वृक्ष के समान विशाल धनुष धारण किए हुए थे। जब वे मेरे लिए बाण उठाने लगे, तो दयालु ऋषियों ने उन्हें रोक दिया। वह बाण काली अग्नि के समान भयंकर था। क्रोधित होते हुए भी, ऋषियों के कहने पर अमर भार्गव ने उस बाण का अंत कर दिया।
 
Parshuram was carrying a bow as huge as a palm tree. When he started to lift the arrow for me, the kind sages stopped him. That arrow was as dreadful as black fire. In spite of being angry, the immortal Bhaargava ended that arrow at the behest of the sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)