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mahabharat 5.181.7: उस शक्ति के कट जाने पर परशुरामजी क्रोध से भर गए और उन्होंने एक के बाद एक बारह और भयंकर शक्तियाँ छोड़ीं। भरत! वे इतनी तेजस्वी और तीव्र थीं कि उनके रूप का वर्णन करना असंभव है।   |   mahabharat अध्याय 5.181: भीष्म और परशुरामका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 181: भीष्म और परशुरामका युद्ध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.181.7 
तस्यां छिन्नायां क्रोधदीप्तोऽथ राम:
शक्तीर्घोरा: प्राहिणोद् द्वादशान्या:।
तासां रूपं भारत नोत शक्यं
तेजस्वित्वाल्लाघवाच्चैव वक्तुम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस शक्ति के कट जाने पर परशुरामजी क्रोध से भर गए और उन्होंने एक के बाद एक बारह और भयंकर शक्तियाँ छोड़ीं। भरत! वे इतनी तेजस्वी और तीव्र थीं कि उनके रूप का वर्णन करना असंभव है।
 
When that Shakti was cut, Parsuram ji was filled with anger and he released twelve more dreadful Shaktis one after the other. Bhaarat! They were so radiant and swift that it is impossible to describe their form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)