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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.180.38 
एवं तदभवद् युद्धं तदा भरतसत्तम।
संध्याकाले व्यतीते तु व्यपायात् स च मे गुरु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
भारतभूषण! इस प्रकार युद्ध चलता रहा। जब संध्या हो गई, तो मेरे गुरु युद्धभूमि से चले गए।
 
Bharatbhushan! In this way the battle continued. When the evening passed, my Guru left the battlefield.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि रामभीष्मयुद्धे अशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें परशुराम-भीष्मयुद्धविषयक एक सौ असीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)