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mahabharat 5.180.30: तत्पश्चात् उस महायुद्ध में परशुरामजी ने शीघ्रतापूर्वक छोड़े हुए अस्त्र से मेरे घोड़ों को मारकर निर्भय होकर मेरे पंखों से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 5.180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.180.30 
हत्वा हयांस्ततो राम: शीघ्रास्त्रेण महाहवे।
अवाकिरन्मां विस्रब्धो बाणैस्तैर्लोमवाहिभि:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस महायुद्ध में परशुरामजी ने शीघ्रतापूर्वक छोड़े हुए अस्त्र से मेरे घोड़ों को मारकर निर्भय होकर मेरे पंखों से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Then in that great war Parasurama, having killed my horses with the weapon released quickly, fearlessly began to shower upon me arrows flying from my wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)