Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.180.26-27: हे कुरुणानन्द! उस समय समस्त तपस्वीगण और कारीराज की कन्या अत्यन्त व्याकुल होकर सहसा उनकी ओर दौड़ीं और उनके हृदय को स्पर्श करके, हाथों से सहलाकर, उन पर शीतल जल छिड़ककर तथा विजयसूचक आशीर्वाद देकर उन्हें सान्त्वना देने लगीं॥ 26-27॥ | mahabharat अध्याय 5.180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत एनं समुद्विग्ना: सर्व एवाभिदुद्रुवु:।
तपोधनास्ते सहसा काश्या च कुरुनन्दन॥ २६॥
तत एनं परिष्वज्य शनैराश्वासयंस्तदा।
पाणिभिर्जलशीतैश्च जयाशीर्भिश्च कौरव॥ २७॥
अनुवाद
हे कुरुणानन्द! उस समय समस्त तपस्वीगण और कारीराज की कन्या अत्यन्त व्याकुल होकर सहसा उनकी ओर दौड़ीं और उनके हृदय को स्पर्श करके, हाथों से सहलाकर, उन पर शीतल जल छिड़ककर तथा विजयसूचक आशीर्वाद देकर उन्हें सान्त्वना देने लगीं॥ 26-27॥
Kuruṇānanda! At that time all the ascetics and the daughter of the King of Kaṛīra were extremely distressed and suddenly they ran towards him and started consoling him by touching his heart, caressing him with their hands and sprinkling cold water on him and giving him blessings indicating victory.॥ 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥