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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  5.180.10-11 
ततो दिवि महान् नाद: प्रादुरासीत् समन्तत:॥ १०॥
ततोऽहमस्त्रं वायव्यं जामदग्न्ये प्रयुक्तवान्।
प्रत्याजघ्ने च तद् रामो गुह्यकास्त्रेण भारत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस समय आकाश में चारों ओर बड़ा कोलाहल हो रहा था। उसी समय मैंने जमदग्निपुत्र पर वायव्यास्त्र का प्रयोग किया था। भरत! परशुरामजी ने गुह्यकास्त्र से मेरे उस अस्त्र को शांत कर दिया। 10-11।
 
At that time, there was a lot of noise all around in the sky. At the same time, I used Vayavyastra on Jamadagni's son. Bhaarat! Parshuramji silenced that weapon of mine with Guhyakastra. 10-11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)