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mahabharat 5.18.8: महाराज युधिष्ठिर! इस प्रकार देवताओं के राजा इन्द्र ने अथर्वङ्गिरों की पूजा करके उन्हें विदा किया।   |   mahabharat अध्याय 5.18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.18.8 
एवं सम्पूज्य भगवानथर्वाङ्गिरसं तदा।
व्यसर्जयन्महाराज देवराज: शतक्रतु:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! इस प्रकार देवताओं के राजा इन्द्र ने अथर्वङ्गिरों की पूजा करके उन्हें विदा किया।
 
Maharaja Yudhishthira! In this manner, Lord Indra, the King of the Gods, worshipped the Atharvangiras and sent them off.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)