Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.18.5-6: इससे भगवान् इन्द्र उस पर बहुत प्रसन्न हुए और उस समय उन्होंने अथर्वंगीरस को यह वरदान दिया-॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  5.18.5-6 
तत: स भगवांस्तत्र अङ्गिरा: समदृश्यत।
अथर्ववेदमन्त्रैश्च देवेन्द्रं समपूजयत्॥ ५॥
तदनन्तर वहाँ भगवान‍् अंगिराने दर्शन दिया और अथर्ववेदके मन्त्रोंसे देवेन्द्रका पूजन किया॥ ५॥
ततस्तु भगवानिन्द्र: संहृष्ट: समपद्यत।
वरं च प्रददौ तस्मै अथर्वाङ्गिरसे तदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इससे भगवान् इन्द्र उस पर बहुत प्रसन्न हुए और उस समय उन्होंने अथर्वंगीरस को यह वरदान दिया-॥6॥
 
Due to this Lord Indra was very pleased with him and at that time he gave this boon to Atharvangiras -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)