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mahabharat 5.18.4: सौ यज्ञ संपन्न करके देवराज इन्द्र अपनी रानी शची से मिलकर अत्यंत प्रसन्न हुए और स्वर्ग पर शासन करने लगे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 5.18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.18.4 
स समेत्य महेन्द्राण्या देवराज: शतक्रतु:।
मुदा परमया युक्त: पालयामास देवराट्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सौ यज्ञ संपन्न करके देवराज इन्द्र अपनी रानी शची से मिलकर अत्यंत प्रसन्न हुए और स्वर्ग पर शासन करने लगे॥4॥
 
Having performed a hundred sacrifices, the King of the Gods Indra, after meeting his Queen Sachi, became extremely happy and began to rule the heaven. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)