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mahabharat 5.18.22: शल्यके वचन सुनकर महाबाहु कुन्तीपुत्र युधिष्ठिरने मद्रराजसे यह वचन कहा-॥22॥   |   mahabharat अध्याय 5.18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.18.22 
श्रुत्वा तु शल्यवचनं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
प्रत्युवाच महाबाहुर्मद्रराजमिदं वच:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शल्यके वचन सुनकर महाबाहु कुन्तीपुत्र युधिष्ठिरने मद्रराजसे यह वचन कहा-॥22॥
 
On hearing Shalya's words, the mighty-armed Yudhishthira, son of Kunti, spoke these words to the Madra king -॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)