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mahabharat 5.18.16: जब शत्रु सेना पंक्तिबद्ध होकर खड़ी हो, तब विजय चाहने वाले राजा को 'इन्द्रविजय' नामक इस वेदरूपी कथा को अवश्य सुनना चाहिए ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 18: इन्द्रका स्वर्गमें जाकर अपने राज्यका पालन करना, शल्यका युधिष्ठिरको आश्वासन देना और उनसे विदा लेकर दुर्योधनके यहाँ जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.18.16 
उपाख्यानमिदं शक्रविजयं वेदसम्मितम्।
राज्ञा व्यूढेष्वनीकेषु श्रोतव्यं जयमिच्छता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब शत्रु सेना पंक्तिबद्ध होकर खड़ी हो, तब विजय चाहने वाले राजा को 'इन्द्रविजय' नामक इस वेदरूपी कथा को अवश्य सुनना चाहिए ॥16॥
 
When the enemy army is standing in formation, a king who desires victory must listen to this Veda-like tale called 'Indravijaya'. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)