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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.179.7 
मनसा विहिते पुण्ये विस्तीर्णे नगरोपमे।
दिव्याश्वयुजि संनद्धे काञ्चनेन विभूषिते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उसका आकार एक नगर के समान था। उन्होंने अपने मन के संकल्प से उस पवित्र रथ का निर्माण किया था। उसमें दिव्य घोड़े जुते हुए थे। वह स्वर्ण-मंडित रथ हर प्रकार से सुसज्जित था।
 
Its size was like that of a city. He had constructed that holy chariot with his mental resolve. Divine horses were harnessed to it. That golden decorated chariot was well-equipped in every way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)