Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.179.33: वे नाना प्रकार के भयानक बाण मुझ पर आक्रमण करने लगे और मेरे नाभि-स्थानों को भेदने लगे। उनका वेग अत्यन्त तीव्र था। वे साँप, अग्नि और विष के समान प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने मुझे काँपने पर मजबूर कर दिया। 33। | mahabharat अध्याय 5.179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते समासाद्य मां रौद्रा बहुधा मर्मभेदिन:।
अकम्पयन् महावेगा: सर्पानलविषोपमा:॥ ३३॥
अनुवाद
वे नाना प्रकार के भयानक बाण मुझ पर आक्रमण करने लगे और मेरे नाभि-स्थानों को भेदने लगे। उनका वेग अत्यन्त तीव्र था। वे साँप, अग्नि और विष के समान प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने मुझे काँपने पर मजबूर कर दिया। 33।
Those various types of dreadful arrows started attacking me and piercing my vital spots. Their speed was great. They looked like snakes, fire and poison. They made me tremble. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥