Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.179.3-4: तब परशुराम जी ने रणभूमि में किंचित् मुस्कुराते हुए मुझसे कहा - 'कुरुनंदन भीष्म! मेरे लिए तो पृथ्वी ही मेरा रथ है, चारों वेद उत्तम घोड़ों के समान मेरे वाहन हैं, वायुदेव मेरे सारथि हैं और वेदों की माताएँ (गायत्री, सावित्री और सरस्वती) मेरे कवच हैं। इन सबसे आवृत और सुरक्षित होकर मैं रणभूमि में युद्ध करूँगा।'॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 5.179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब परशुराम जी ने रणभूमि में किंचित् मुस्कुराते हुए मुझसे कहा - 'कुरुनंदन भीष्म! मेरे लिए तो पृथ्वी ही मेरा रथ है, चारों वेद उत्तम घोड़ों के समान मेरे वाहन हैं, वायुदेव मेरे सारथि हैं और वेदों की माताएँ (गायत्री, सावित्री और सरस्वती) मेरे कवच हैं। इन सबसे आवृत और सुरक्षित होकर मैं रणभूमि में युद्ध करूँगा।'॥3-4॥
Then Parshuram Ji, smiling a little, said to me in the battlefield - 'Kurunandan Bhishma! For me the earth itself is my chariot, the four Vedas are my vehicles like excellent horses, Vayudev is my charioteer and the mothers of Vedas (Gayatri, Savitri and Saraswati) are my armor. Covered and protected by all these, I will fight in the battlefield.'॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥