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श्लोक  5.179.29 
काये विषक्तास्तु तदा वायुना समुदीरिता:।
चेलु: क्षरन्तो रुधिरं नागा इव च ते शरा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वे बाण, हवा से उड़ते हुए साँपों की तरह, परशुराम के शरीर में घुस गए और बह गए, जिससे रक्त बहने लगा।
 
Those arrows, like snakes blown by the wind, penetrated Parasurama's body and went flowing, causing blood to flow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)