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mahabharat 5.179.15: परशुरामजी ने कहा- कुरुश्रेष्ठ! जो योद्धा उन्नति करना चाहता है, उसे ऐसा ही करना चाहिए। महाबाहु! श्रेष्ठ गुरुओं के साथ युद्ध करने वाले राजाओं का यही धर्म है।   |   mahabharat अध्याय 5.179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.179.15 
राम उवाच
एवमेतत् कुरुश्रेष्ठ कर्तव्यं भूतिमिच्छता।
धर्मो ह्येष महाबाहो विशिष्टै: सह युध्यताम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
परशुरामजी ने कहा- कुरुश्रेष्ठ! जो योद्धा उन्नति करना चाहता है, उसे ऐसा ही करना चाहिए। महाबाहु! श्रेष्ठ गुरुओं के साथ युद्ध करने वाले राजाओं का यही धर्म है।
 
Parshuramji said- Kurusrestha! Every warrior who wants to progress should do the same. Great arms! This is the religion of kings who fight with their superior teachers. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)