अथादृश्यत धर्मात्मा भृगुश्रेष्ठो महातपा:।
आह्वयामास च तदा युद्धाय द्विजसत्तम:॥ ९५॥
अनुवाद
इतने में ही भृगुकुलतिलक ब्राह्मण शिरोमणि महातपस्वी एवं धर्मात्मा परशुरामजी प्रकट हुए और उन्होंने आगे बढ़कर भीष्म को युद्ध के लिए ललकारा ॥95॥
In the meantime, Bhrigukultilak Brahmin and Shiromani, great ascetic and religious person Parshuramji appeared. He came forward and challenged Bhishma for war. 95॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि परशुरामभीष्मयो: कुरुक्षेत्रावतरणे अष्टसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें परशुराम और भीष्मका कुरुक्षेत्रमें युद्धके लिये अवतरणविषयक एक सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥