Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.178.93: साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भीष्म आपके शिष्य हैं; अतः आपको उनसे युद्ध नहीं करना चाहिए। तब परशुरामजी ने मेरी विनती करनेवाली माता से कहा - 'पहले आप भीष्म को युद्ध से विरत कर दें। वे मेरी इच्छा के अनुसार कार्य नहीं कर रहे हैं; इसीलिए मैंने उन पर आक्रमण किया है।'॥93॥ | mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मेण सह मा योत्सी: शिष्येणेति वचोऽब्रवीत्।
स च तामाह याचन्तीं भीष्ममेव निवर्तय।
न च मे कुरुते काममित्यहं तमुपागमम्॥ ९३॥
अनुवाद
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भीष्म आपके शिष्य हैं; अतः आपको उनसे युद्ध नहीं करना चाहिए। तब परशुरामजी ने मेरी विनती करनेवाली माता से कहा - 'पहले आप भीष्म को युद्ध से विरत कर दें। वे मेरी इच्छा के अनुसार कार्य नहीं कर रहे हैं; इसीलिए मैंने उन पर आक्रमण किया है।'॥93॥
Also he said that Bhishma is your disciple; therefore you should not fight with him. Then Parshuram ji said to my pleading mother - 'First you should retire Bhishma from the war. He is not acting according to my wishes; that is why I have attacked him'॥93॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥