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श्लोक  5.178.92 
तत: सा राममभ्येत्य जननी मे महानदी।
मदर्थं तमृषिं वीक्ष्य क्षमयामास भार्गवम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद मेरी जन्मदात्री मां गंगा भृगुनंदन परशुरामजी के पास गईं और उनसे क्षमा मांगी।
 
After that, my birth mother Ganga went to Bhrigunandan Parshuramji and asked for forgiveness from him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)