श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  5.178.92 
तत: सा राममभ्येत्य जननी मे महानदी।
मदर्थं तमृषिं वीक्ष्य क्षमयामास भार्गवम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद मेरी जन्मदात्री मां गंगा भृगुनंदन परशुरामजी के पास गईं और उनसे क्षमा मांगी।
 
After that, my birth mother Ganga went to Bhrigunandan Parshuramji and asked for forgiveness from him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)