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mahabharat 5.178.89: अन्त में उसने फिर कहा - 'बेटा! क्षत्रियों का संहार करने वाले परशुरामजी महादेवजी के समान पराक्रमी हैं। क्या तुम उन्हें नहीं जानते, जो उनसे युद्ध करना चाहते हो?'॥89॥   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  5.178.89 
किन्न वै क्षत्रियहणो हरतुल्यपराक्रम:।
विदित: पुत्र रामस्ते यतस्तं योद्‍धुमिच्छसि॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
अन्त में उसने फिर कहा - 'बेटा! क्षत्रियों का संहार करने वाले परशुरामजी महादेवजी के समान पराक्रमी हैं। क्या तुम उन्हें नहीं जानते, जो उनसे युद्ध करना चाहते हो?'॥89॥
 
At last she said again, 'Son! The slayer of Kshatriyas, Parashurama, is as valiant as Mahadevji. Don't you know him, that you want to fight with him?'॥ 89॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)