श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  5.178.88 
मा मैवं पुत्र निर्बन्धं कुरु विप्रेण पार्थिव।
जामदग्न्येन समरे योद्‍धुमित्येव भर्त्सयत्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
"बेटा! ऐसी बातों पर हठ मत करो। हे राजन! युद्धभूमि में महान ब्राह्मण जमदग्नि के पुत्र परशुराम से युद्ध करने का हठ करना अच्छा नहीं है।" ऐसा कहकर वह उसे डाँटने लगी।
 
"Son! Do not insist on such things. O King! It is not good to insist on fighting with the great Brahmin Jamadagni's son Parashurama in the battlefield." Saying this, she started scolding him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)