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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना
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श्लोक 87
श्लोक
5.178.87
गत्वाहं जामदग्न्यं तु प्रयाचिष्ये कुरूद्वह।
भीष्मेण सह मा योत्सी: शिष्येणेति पुन: पुन:॥ ८७॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! मैं स्वयं जाकर जमदग्निपुत्र परशुराम से बार-बार प्रार्थना करूँगा कि आप अपने शिष्य भीष्म के साथ युद्ध न करें।
O best of the Kurus! I myself will go and repeatedly request Parasurama, son of Jamadagni, that you should not fight with your disciple Bhishma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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