श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  5.178.85 
ततस्ते तापसा: सर्वे भार्गवस्यानुयायिन:।
प्रेक्षका: समपद्यन्त परिवार्य रणाजिरम्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् परशुरामजी के साथ आये हुए सभी तपस्वीगण युद्धभूमि को चारों ओर से घेरकर दर्शक बन गये।
 
Thereafter all the ascetics who had come with Parasurama surrounded the battle-field from all sides and became spectators. 85
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)