श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  5.178.83 
ततस्तत्र द्विजा राजंस्तापसाश्च वनौकस:।
अपश्यन्त रणं दिव्यं देवा: सेन्द्रगणास्तदा॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय बहुत से ब्राह्मण, वनवासी तपस्वी तथा इन्द्र आदि देवतागण उस दिव्य युद्ध को देखने लगे।
 
King! At that time many Brahmins, forest-dwelling ascetics and gods including Indra began to witness that divine battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)