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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना
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श्लोक 82
श्लोक
5.178.82
तत: संदर्शनेऽतिष्ठं रामस्यातितपस्विन:।
प्रगृह्य शङ्खप्रवरं तत: प्राधममुत्तमम्॥ ८२॥
अनुवाद
तत्पश्चात् मैं महातपस्वी परशुरामजी के समक्ष खड़ा हुआ और अपना श्रेष्ठ शंख हाथ में लेकर जोर-जोर से बजाने लगा।
Thereafter I stood before the great ascetic Parasurama and taking my best conch in my hand began blowing it loudly. 82.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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