श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  5.178.80 
ते हयाश्चोदितास्तेन सूतेन परमाहवे।
अवहन् मां भृशं राजन् मनोमारुतरंहस:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मेरे घोड़े मन और वायु के समान वेगवान थे। सारथी द्वारा हाँके जाने पर वे मुझे क्षण भर में ही उस महायुद्ध स्थल पर ले गए।
 
O King! My horses were as swift as the mind and the wind. Driven by the charioteer, they took me to the site of that great battle in no time. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)