श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  5.178.79 
स्तूयमानो जयाशीर्भिर्निष्क्रम्य गजसाह्वयात्।
कुरुक्षेत्रं रणक्षेत्रमुपायां भरतर्षभ॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
हे भारतभूषण! मैं विजयसूचक आशीर्वाद से स्तुति कर रहा था। उस अवस्था में मैं हस्तिनापुर छोड़कर कुरुक्षेत्र की रणभूमि में गया। 79।
 
I was being praised with blessings indicating victory. O Bharatbhushan! In that state I left Hastinapur and went to the battlefield of Kurukshetra. 79.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)