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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना
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श्लोक 71
श्लोक
5.178.71
इति ब्रुवाणं तमहं रामं परपुरंजयम्।
प्रणम्य शिरसा राममेवमस्त्वित्यथाब्रुवम्॥ ७१॥
अनुवाद
जब मैंने शत्रुओं के नगर को जीतने वाले परशुराम को ऐसा कहते देखा, तब मैंने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और ‘ऐसा ही हो’ कहकर उनकी आज्ञा स्वीकार कर ली।
When I saw Parasurama, the conqueror of the city of enemies, saying this, I bowed my head and saluted him and accepted his command saying 'So be it'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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